दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला: जन सुनवाई के दौरान थप्पड़ की घटना से सनसनी

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2025 (06:47 AM EDT) – दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर मंगलवार को उनकी सिविल लाइंस आवास पर आयोजित साप्ताहिक जन सुनवाई (जन सुनवाई) के दौरान एक शख्स ने हमला कर दिया, जिससे पूरे राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैल गई। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने मुख्यमंत्री से मिलने के बहाने कागजात सौंपे और फिर उन पर थप्पड़ मारने की कोशिश की। हालांकि, तुरंत कार्रवाई करते हुए सुरक्षा कर्मियों ने हमलावर को पकड़ लिया और पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है। इस घटना ने सुरक्षा और लोकतंत्र के प्रति चिंता को बढ़ा दिया है।दिल्ली सीएमओ के बयान के अनुसार, हमलावर ने सुबह की जन सुनवाई के दौरान गुप्ता के साथ बातचीत के दौरान यह वारदात को अंजाम देने की कोशिश की। घटना के बाद रेखा गुप्ता को चोटें आईं, जिसमें उनके हाथ और सिर पर चोट शामिल है, और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है, और सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि हमलावर ने 24 घंटे पहले से इसकी तैयारी की थी, जिसमें उनके आवास की रेकी भी शामिल थी।इस घटना की निंदा करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अतिशी ने कहा, “दिल्ली की मुख्यमंत्री पर हमला अत्यंत निंदनीय है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध के लिए जगह है, लेकिन हिंसा के लिए नहीं।” वहीं, दिल्ली कांग्रेस प्रमुख देवेंद्र यादव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और सुरक्षा में चूक का मुद्दा उठाया। भाजपा नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि रेखा गुप्ता एक “मजबूत” महिला हैं और उन्होंने अपने कार्यक्रम रद्द नहीं किए हैं।पाठकों की प्रतिक्रियाएं:

  1. @AnkitSingh_Delhi: “यह घटना बेहद शर्मनाक है। मुख्यमंत्री की सुरक्षा पर सवाल उठता है। सख्त कार्रवाई होनी चाहिए!”
  2. @NehaKapoor_ND: “क्या हो रहा है दिल्ली में? जन सुनवाई में भी हिंसा? जांच जरूरी है कि हमलावर का मकसद क्या था।”
  3. @RakeshBJP123: “यह अराजकता का प्रतीक है। सरकार को तुरंत कदम उठाना चाहिए, वरना हालात बेकाबू हो जाएंगे।”
  4. @PriyankaAAPFan: “रेखा जी पर हमला दुखद है। आप सरकार को इसकी जड़ तक जाना चाहिए, हिंसा को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए।”
  5. @VijayKumar_INC: “यह सब राजनीतिक साजिश लगती है। जांच से सच्चाई सामने आएगी, जल्दबाजी में नतीजे न निकालें।”

यह घटना दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रही है। क्या यह एक संगठित हमला था या व्यक्तिगत रोष का नतीजा? पुलिस जांच ही इसका जवाब देगी, लेकिन इस घटना ने आम जनता के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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