नई दिल्ली, 19 अगस्त 2025 (01:13 PM EDT) – सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट ने भारतीय राजनीति में तहलका मचा दिया है, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यूजर @janakraj13 द्वारा पोस्ट किए गए इस संदेश में दावा किया गया है कि राहुल गांधी का असली मकसद भारत के लोकतंत्र को बदनाम करना और पश्चिमी देशों को हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए आमंत्रित करना है। पोस्ट में कहा गया है कि राहुल लगातार चुनाव प्रक्रिया, ईवीएम, और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर एक ऐसा माहौल बना रहे हैं, जो विदेशी ताकतों के लिए भारत में दखल देने का रास्ता खोल सकता है।
"राहुल गांधी का असली खेल समझो ..अगर देश के लिए सोचते हो ,जैसा वो दिखता है बोलता है वैसा वो है नहीं , 🔥
— Janakraj Agrawal (@janakraj13) August 19, 2025
अब आगे ध्यान से सुनो …🙏
राहुल गांधी को देखकर अब किसी को भी समझने में देर नहीं लगनी चाहिए कि उनका असली एजेंडा क्या है.
वे लगातार भारतीय चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने में… pic.twitter.com/el9U3KPAU4
पोस्ट में बांग्लादेश के हालिया राजनीतिक संकट (2025) का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि वहां लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया के बहाने अराजकता फैलाई गई, जिसके बाद विदेशी प्रभाव बढ़ा। लेखक का कहना है कि राहुल गांधी भी इसी रणनीति का हिस्सा हैं और उनका लक्ष्य पश्चिमी राजधानियों को संदेश देना है कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है, ताकि वे “लोकतंत्र बचाने” के नाम पर हस्तक्षेप करें। पोस्ट में यह भी कहा गया है कि 2024 के चुनावों में भारतीय मतदाताओं ने राहुल को नकार दिया है, लेकिन वे अब विदेशी ताकतों के लिए एक “प्रॉजेक्ट” बन गए हैं।
इस पोस्ट के साथ कई यूजर्स ने समर्थन जताया है। @ibmindia20 ने लिखा, “राहुल गांधी का असली खेल भारत को बदनाम करके विदेशियों को बुलाना है। जनता ने 2024 में उन्हें नकार दिया, अब वे पश्चिम की गोद में हैं।” वहीं, @profsaritasidh ने कहा, “राहुल का मकसद देश को कमजोर करना है, यह उनकी रणनीति का हिस्सा है।”
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये आरोप बिना ठोस सबूतों के लगाए गए हैं। द हिंदू की एक रिपोर्ट (5 अगस्त 2025) में चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन यह राहुल गांधी के इरादों से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है। इतिहासकारों का कहना है कि विदेशी हस्तक्षेप के उदाहरण (जैसे अफगानिस्तान और जर्मनी) सही हैं, लेकिन इसे राहुल पर थोपना जल्दबाजी हो सकती है।
पाठकों की प्रतिक्रियाएं:
1. **@RaviSharma_IN**: “यह पोस्ट सही दिशा में सोचने को मजबूर करती है। राहुल के बयानों में विदेशी एजेंडा साफ दिखता है। जनता को जागरूक होना होगा!”
2. **@PriyaDesai88**: “मुझे लगता है ये सब राजनीतिक प्रचार है। बिना सबूत के ऐसे आरोप गंभीर हैं। जांच होनी चाहिए।”
3. **@AmitPatel_BJP**: “राहुल गांधी देशद्रोही हैं। उनकी विदेश यात्राओं और बयानों से साफ है कि वे भारत को कमजोर करना चाहते हैं।”
4. **@SnehaKhanINC**: “यह सब झूठ है। राहुल जी लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं, न कि इसे बेचने। ये पोस्ट भ्रामक है।”
5. **@VikramSingh77**: “बांग्लादेश का उदाहरण सटीक है। अगर समय रहते नहीं चेते तो भारत भी वही हाल करेगा।”
यह पोस्ट और इसके बाद आई प्रतिक्रियाएं भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रही हैं। क्या राहुल गांधी वाकई विदेशी हस्तक्षेप की योजना बना रहे हैं, या यह उनकी आलोचना करने का एक और तरीका है? समय और जांच ही इसका जवाब देगी।